Tungnath Temple image

 

पंच केदार की यात्रा का दूसरा पड़ाव है तुंगनाथ मंदिर जो की विश्वभर में शिव के सबसे ऊँचे स्थित मंदिर के रूप में जाना जाता है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थापित यह मंदिर लगभग १००० वर्षों पुराना शिव का मंदिर है। मंदिर की ऊँचाई समुद्र सतह से ३६८० किलोमीटर की है। इस मंदिर के निर्माण के पीछे यह कथा है की जब पाण्डवो पर अपने ही कुलवंशियो के हत्या का कलंक लगा गया था तब महर्षि व्यास द्वारा इस कलंक से मुक्ति के लिए देवों के देव महादेव की उपासना करने का सुझाव दिया गया। इस सुझाव का पालन करते हुए पाण्डवो ने इस मंदिर का निर्माण करवाया तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव के हाथ की पूजा की जाती है जो की वास्तुकाल के उत्तर भारतीय शैली का प्रतिनिधित्व करती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर नन्दी बैल की पत्थर की मूर्ति है। नन्दी बैल को शिव की सवारी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के भीतर पाण्डवो के साथ साथ काल भैरव व हिंदू संत महर्षि व्यास की भी मूर्ति स्थित है। तुंगनाथ मंदिर की पहाड़ी से अलकनंदा व मंदाकिनी नदियों का सुंदर दृश्य देखते ही बनता है इन नदियों के संगम को अक्षकमिनी का नाम दिया गया है। बारह से चौदह हज़ार फ़िट की ऊँचाई पर बने इस मंदिर से गढ़वाल हिमालय की मंत्रमुग्ध करने वाले दृश्यों को देखा जा सकता है।

चोपता पर्यटकों का स्विटज़रलैंड

Heavy snow fall in chopta

 

तुंगनाथ मंदिर से केवल ३ किलोमीटर की दूरी पर बसा चोपता नामक स्थान उत्तराखंड हिमालय की सबसे सुंदर पहाड़ी में से एक है। शीतमाह जनवरी फ़रवरी में सफ़ेद बर्फ़ से ढकी यह घाटी पर्यटकों को अपनी सुंदरता से लुभा देती है तो वही जुलाई अगस्त के माह में इस घाटी की सुंदरता देखते ही बनती है। हरी भरी मख़मालि चादर से ढकी यह घाटी पर्यटकों को स्विटज़रलैंड की याद दिलाती है। वाहनो व बस द्वारा बुग्याल तक आसानी से पहुँचा जा सकता है इसलिए भी पर्यटक के सैर की यह पहली पसंद है। कई पर्यटकों का तो यह भी मानना है कि जिसने अपने पर्यटन भ्रमण में चोपता की सुंदरता नहीं देखा उसका जीवन व्यर्थ है।चोपता में भी शिव का एक प्राचीन मंदिर है मंदिर से केवल डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद चौदह हज़ार फ़िट की ऊँचाई पर चंद्रशिला नामक चोटी दिखाई देती है जहाँ से हिमालय की चोटी सफ़ेद चादर से घिरी हुई नज़र आती है मानो हाथ बढ़ाने पर हिमालय की सुंदरता को स्पर्श कर लिया जाए।

# तुंगनाथ की यात्रा के लिए उचित समय

यू तो तुंगनाथ में शिव के दर्शन व चोपता की सैर कभी भी की जा सकती है परंतु मई से नवम्बर तक का समय यहाँ की यात्रा के लिए सब से अच्छा है। जनवरी फ़रवरी माह में यह घाटी बर्फ़ से ढक जाती है इस माह में आकर पर्यटक  बर्फ़ के मज़े ले सकते है परंतु बर्फ़ गिरी होने के कारण वाहनो से यात्रा कम और पैदल यात्रा अधिक करनी पढ़ती है।

# आवासीय सुविधा

गोपेश्वर और ऊखीमठ, दोनों स्थानों पर गढ़वाल मंडल विकास निगम के विश्रामगृह हैं। इसके अलावा प्राइवेट होटल, लॉज, धर्मशालाएं भी हैं जो सुगमता से मिल जाती हैं। चोपता में भी आवासीय सुविधा उपलब्ध है और यहां पर स्थानीय लोगों की दुकानें हैं।

Camp at chopta

 

आवागमन सुविधा

हवाई मार्ग : तुंगनाथ व चोपता के लिए जॉली ग्रैंट हवाई मार्ग सबसे निकटतम मार्ग है जिसकी दूरी २३० किलोमीटर की है। यहाँ से तुंगनाथ मंदिर के लिए टैक्सी सुविधा भी उपलब्ध है।

रेल मार्ग :  तुंगनाथ के लिए सबसे निकटतम रेल्वे स्टेशन ऋषिकेश रेल्वे स्टेशन है जिसकी दूरी २१० किलोमीटर की है । यहाँ से अन्य नज़दीकी इलाक़ों के लिए बस सुविधाए भी उपलब्ध है । रेल मार्ग द्वारा हरिद्वार रेल्वे स्टेशन भी कई राज्यों से जुड़ा है यहाँ से तुंगनाथ की दूरी २३५ किलोमीटर की है।

सड़क मार्ग : सड़क मार्ग द्वारा भी तुंगनाथ व चोपता सहज रूप जुड़ा है हरिद्वार , ऋषिकेश व दिल्ली आइएसबीटी कश्मीरी गेट से तुंगनाथ के लिए कई बस सुविधा उपलब्ध है जिनका न्युनतम किराया २०० से २३० रुपए तक है । वंही ऋषिकेश द्वारा प्राइवेट टैक्सी की सहायता से भी तुंगनाथ व चोपता तक पहुँचा जा सकता है इसका किराया २५०० से ३००० तक होता है।

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