Kedarnath Temple Devotee

 

उत्तराखंड जिसका दूसरे शब्दों में यदि व्य्ख्यान किया जाए तो इसका दूसरा नाम ‘ देवभूमि ‘ है। अनेको छोटे बड़े व प्राचीन मंदिरो से घिरा यह राज्य अपने प्राचीन संस्कृति व देव्य शक्तियों के लिए जग भर में प्रसिदध है। हिंदूओ के सबसे प्राचीन व पौराणिक तीर्थ स्थल भी उत्तराखंड की आकर्षक वादियों में बसे है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार इन पवित्र तीर्थ स्थल की यात्रा करके मोक्ष प्राप्त किया जाता है। बद्रीनाथ, केदारनाथ , यमनोत्री, गंगोत्री मुख्य चार तीर्थ स्थल है इनके अलावा पंचकेदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान शिव के पाँच मंदिर अपने आलोकिक शक्तियों व इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। केदारनाथ , तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर, रुद्रनाथ व कल्पेश्वर इन पंच केदार के नाम शिव के अनेको नामो में से रखे गए है।

केदारनाथ मंदिर का इतिहास

केदारनाथ मंदिर भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ मंदिर बारह जोतिर्लिंग में सम्मलित होने के साथ साथ चार धामों व पंचकेदार में भी सम्मलित है। ऐसा कहा जाता है की पत्थरों से बने इस कत्यूरि शैली के मंदिर का निर्माण पाण्डवो द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु किया गया था तो आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा इस मंदिर का जीणाद्वार किया गया है। इस मंदिर का इतिहास यह दर्शता है कि इस मंदिर का स्वयंम्भू शिवलिंग अति प्राचीन व पौराणिक है। हिमालय के पास होने के कारण व प्रतिकूल जलवायु को ध्यान में रखते हुए मंदिर के कपाट केवल अप्रैल से नवम्बर महीनो में ही श्रधालुओ के दर्शन हेतु खोले जाते है। केदारनाथ व बद्रीनाथ इन दोनो ही प्रधान तीर्थों का बड़ा ही माहात्म्य है। केदारनाथ मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है की यदि तीर्थयात्रा पर आए श्रदालु  द्वारा केवल बद्रीनाथ के दर्शन किए जाए तो उनकी यात्रा पूरी नहीं होती क्यूँकि नर नारायण इन दोनो मूर्ति के दर्शन के बिना सर्व पापों से मुक्ति नहीं मिल सकती और इन दोनो धामो के दर्शन के बिना यात्रा निष्फल हो जाती है।

Nandi Bull front of Temple

 

केदारनाथ मंदिर की बनावट पूजा की विधि

एक छः फ़िट ऊँचे चौकोर चबूतरे पर बना केदार मंदिर व मंदिर के मुख्य भाग में बना मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। मंदिर के प्रांगण में नन्दी बैल की प्रतिमा विराजमान है। केदारनाथ मंदिर में पूजा करने वाले  पुजारी मुख्यरूप से मैसूर के जगंम ब्राह्मण ही होते है। पुजारियों द्वारा प्रातःकाल शिवलिंग पर जल अर्पण करके स्नान करवाया जाता है तत्पश्चात घी का लेप लिंग पर लेपा जाता है। इस वक़्त श्रधालु मंदिर में प्रवेश कर पूजा कर सकते है परंतु  संध्या के समय जब भगवान का शृंगार किया जाता है उस वक़्त श्रधालुओ को सिर्फ़ दूर से देखने व दर्शन की अनुमति होती है।

दर्शन समय

भगवान केदार का मंदिर आम दर्शनार्थियो के लिए प्रातः ७ (सात ) बजे खोला जाता है। दिन में १ से २ बजे तक विशेष पूजा होती है। उसके बाद मंदिर बंद कर दिया जाता है तत्पश्चात ५ बजे पुनः दर्शन हेतु मंदिर के द्वार खोले जाते है शीतकाल में केदार घाटी बर्फ़ से ढकी होने के कारण छः माह के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते है।

Kedarnath temple during door open

 

आवागमन सुविधा

केदारनाथ मंदिर जाने के लिए हवाई, सड़क व रेल्वे तीनो मार्गों की सुविधा उपलब्ध है।

1.हवाई मार्ग : केदारनाथ के लिए सबसे निकटतम हवाई मार्ग जॉली ग्रेट हवाई अड्डा है जो की केदारनाथ से २३९ किलोमीटर की दूरी पर है। हवाई अड्डे से केदारनाथ के लिए टैक्सी सुविधा भी उपलब्ध है।

2.रेल मार्ग : ऋषिकेश रेल्वे स्टेशन केदारनाथ के लिए सबसे निकटतम रेल्वे स्टेशन है। यहाँ से केदारनाथ तक की दूरी २२१ किलोमीटर की है। ऋषिकेश रेल्वे स्टेशन से यात्रियों के लिए प्रीपेड टैक्सी सुविधा भी उपलब्ध है जिसका किराया लगभग ३००० रु. है। वाहन से २०७ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद केदारनाथ मंदिर पहुँचने के लिए १४ किलोमीटर की दूरी यात्रियों को पैदल तय करना होता है।

3.सड़क मार्ग : यात्रियों द्वारा ऋषिकेश से कोटद्वार व कोटद्वार से केदारनाथ तक बस द्वारा जाया जा सकता है।यात्री केदारनाथ से पैदल यात्रा तय करते हुए गौरीकुंड तक जा कर गौरीकुंड से ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून व कोटद्वार तक की बसो में आवागमन कर सकते है। बसो का किराया यात्रा सीज़न पर निर्भर होता है।

यदि आपने भी केदार यात्रा की है तो आप अपना अनुभव कमेंट के माध्यम से सभी के साथ साझा कर सकते है ।  🙏🏻धन्यवाद 🙏🏻

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