khait parvat

यूं तो हम सब ने अपने बचपन में बड़े बुज़ुर्गों से कोई ना कोई कहानी ज़रूर सुनी होगी। उनके द्वारा बताई जाने वाली कुछ कहानियाँ काल्पनिक होती थी, कुछ मनगढ़ंत परंतु कुछ बातें उनके अपने अनुभव होते थे। इसी प्रकार मेरे द्वार सुने गए उत्तराखंड के ‘खैट मंदिर’ के विषय में उत्तराखंड के ही स्थानीय बुज़ुर्गों द्वारा बताई गई रहस्यमय बातें मै अपने लेखन द्वारा आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास कर रही हूं।

उत्तराखंड के टिहरी ज़िले के फ़ेगुलपट्टी में स्थित थात गाँव से ४-५ किलोमीटर की पैदल दूरी तय करने के पश्चात “खैटखाल” के नाम से पहचाने जाने वाला मंदिर अपनी ही रहस्यमय शक्तियों के लिए पुरे उत्तराखंड में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में पूजी जाने वाली नौ देवियों जिन्हें स्थानी लोगों द्वारा “आछरी भराडी” (परीया) नाम दिया गया है, कहा जाता है कि ये नौ देवियाँ बहन है और ये देवियाँ अदृश्य शक्तियों के रूप मे आज भी उस मंदिर मे स्थित है। इन देवियों की पूजा हेतु आए श्रध्दालुओं के लिए धर्मशालाएँ बनाए गए हैं। कुछ बातें यहाँ की शक्तियों को स्वयम् ही बयान करती है जैसे की उत्तराखंड मे नाज को कुटने के लिए बनाई गई ओखली जिसे उत्तराखंड के लोगों द्वारा उखल्यारी कहा जाता है वह उखल्यारी पारम्परिक रूप से ज़मीन पर बनाई जाती है परंतु यही उखल्यारी खैट मे ज़मीन पर नही बल्कि दीवारों पर बनी है। यहॉ कई फसलों की उपज होती है परंतु वे फ़सलें व फल भी केवल उस मंदिर के परिसर तक ही खाने योग्य होते हैं, मंदिर व वहाँ के परिसर के बाहर वे वस्तुएँ निरुपयोगी हो जाती है। कहा जाता है इन आछरियो(परियों) को जो लोग अच्छे लगते हैं वे उन्हें मूर्च्छित करके अपने लोक मे शामिल कर लेती है इन सब बातों के कारण इस मंदिर की अपनी अलग ही विशेषताएँ हैं और ऐसी कई अन्य शक्तियाँ आज भी उत्तराखंड मे मौजूद है। यहाँ आज भी देवताओं का वास है तभी तो उत्तराखंड ‘देवभूमि’ के नाम से जाना जाता है।

इस विषय मे हमें सुधाकर भट्ट  जी ने और भी बहुत सटीक जानकारी दी है। हम उस जानक़ारी को इसमे जोड रहे हैं, तथा सुधाकर  जी का आभार व्यक्त करते हैं!

उल्टी ओखली, लहसुन की खेती, अखरोट के बागान “पीड़ी पर पर्वत” पर स्थित मां भराड़ी के मंदिर से कुछ दूरी पर “लुक्की पिडी” में है।

और आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि।
पीड़ी पर्वत पर और भी बहुत रहस्यमयी जगह है जैसे कि।

गर्भजोन गुफा – जिसका कोई अंत नहीं है
धरती फाड़ – जहां की कई मान्यताएं है कुछ लोग कहते है कि मधु – खैटव वध के समय माता रानी के शेर की दहाड से धरती फट गयी थी

त्रिमूर्ति- यहां पर शिव, पार्वती, गणेश भगवान की प्रतिमायें है जो खोजबीन को दौरान मिट्टी में दबी मिली और साथ ही एक शिवलिंग भी मिला।
और माना जाता है कि यहीं पर रावण ने भगवान शंकर की तपस्या की थी।

चोखुंडू चोतरू – यह एक मैदान रूपी जगह है और माना जाता है कि यहां पर रात्री में आछरियां (परियाँ) खेल खेलती है।

भूलभुलैया- यहाँ पर एक गुफा है जहां पर बहुत भूलभुलैया है
और इस गुफा के अंदर पत्थर पर नाग देवता के बहुत सारे प्रतिबिंब बने है।

और यहाँ हर वर्ष भागवत कथा का आयोजन होता है
और हजारों की तादाद में श्रध्दालु आते हैं ।
और यहां से लोग प्रसाद रूप में “नैर – थुनैर” लेकर जाते है ।

नैर-थुनैर दो अलग-अलग वृक्ष है जिनकी पत्तियां बहुत खुशबूदार होती है।
और इसी वजह से पिडी के जंगल में एक सुन्दर सी महक चलती रहती।

और लोग इन पत्तियों का इस्तेमाल सुखा कर
हवन इत्यादि, मैं करते हैं
और यह वृक्ष पूरे भारत में बहुत ही कम स्थानो पर मिलते हैं।

अगर आपको अब भी विश्वास नहीं हुआ तो ‘इ-टीवी’ द्वारा बनाये गए इस विडियो को आपको जरूर देखना चाहिए।

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