संगीत वर्षों वर्षों से लिखा गुनगुनाया जाता रहा है। एक अच्छा संगीत मनुष्य की मनोदशा (mood) को भी बदलने में काफ़ी हद तक कारगर होता है। लगभग हर भाषा का अपना संगीत होता है अपने कई वाद्यंयंत्र व धुने होती है जिससे उस भाषा को जाना व समझा भी जाता है। कई संगीत व धुने संस्कृति व परंपराओं को भी दर्शाता है।

uttarakhand folk music instrument
उत्तराखंड की संस्कृति व परम्पराओं को दर्शाने में यहाँ के संगीत व वाद्ययंत्रो का भी मुख्य योगदान है।यहाँ की लोक धुनें भी अन्य प्रदेशों से भिन्न है यहाँ के वाद्ययंत्र ढोल, दमों, रणसिंघ्या, मशकाबाज़ू, बीन, बंसुली इ॰ जो की आमतौर पर हर आयोजन मे बजाए जाते है और इन वाद्ययंत्रो के साथ ही साथ गीत भी गाए जाते है। वही त्योहारो व शुभकार्यों में लोकनृत्य किया जाता है जिसे उत्तराखंड के स्थानीय लोगों द्वारा मंडाड, झुमेलो कहा जाता है। इस लोकनृत्य का मुख्य मक़सद लोगों का मनोरंजन करना व लोगों में एकता बनाए रखना होता है। उत्तराखंड के इस लोकनृत्य व लोकधुनो की और भी कई भूमिकाएँ है। उत्तराखंड में मनुष्य ही नहीं बल्कि देवी देवताओं को भी ख़ुश करने के लियें लोकनृत्य व लोकगीत गाए जाते है। इस प्रकार उत्तराखंड के लोकगीतो, लोकनृत्य व वाद्ययंत्रो की भी अपनी ही एक विशेषता है।

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