हर उत्तराखंडी के चेहरे पर मुस्कान हो उत्तराखंडी बोली के साथ (हास्यकलाकार भगवान चंद जी)

जहाँ आज के दौर में प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को सफल व कामयाब बनाने की दौड़ में व्यस्त है। वही कुछ ऐसे लोग भी है जो अपनी संस्कृति, बोलिभाषा व सभ्यताओं को बचाने में कार्यरत है। वर्ष १९७० को उत्तराखंड के टिहरी जिले के ‘ पंचधार ‘ गाँव में जन्मे ‘ भगवान चंद जी ‘ बिना किसी स्वार्थ के उत्तराखंड की संस्कृति व बोलिभाषा के संरक्षण में जुटे है। भगवान चंद जी के अनुसार जहाँ आज के समय मे उत्तराखंड पलायन की मार झेल रहा है ,बड़ी संख्या में लोग गाँव से शहरो की तरफ़ बढ़ रहे है वही शहरो के वातावरण को अपनाते हुए वे अपने पूर्वजों की वास्तविक संस्कृति बोलिभाषा को भूलते जा रहे है जिसका परिणाम उत्तराखंड के वर्षों पुराने इतिहास व आने वाले समय पर पड़ रहा है। इसी सिलसिले में कुछ वर्षों पहले भगवान चंद जी व उनके कुछ सहयोगियों द्वारा कुछ शहरो में ( दिल्ली , देहरादून, पंजाब ) में रहने वाले उत्तराखंडी परिवार पर उत्तराखंडी बोली के विषय में सर्वे (जाँच ) किया गया। जिसका परिणाम उन्हें काफ़ी चिंता जनक प्राप्त हुआ। उत्तराखंड की आधे से अधिक युवा पीढ़ी उत्तराखंडी बोली बोलना नहीं जानती तो कई माता पिता  का कहना था उनके बच्चे समझ लेते है बोलना नहीं जानते। सबसे अधिक निराशाजनक परिणाम उत्तराखंड की राजधानी ‘ देहरादून ‘ के मिले उत्तराखंड से सबसे पास होने के बावजूद वहाँ की युवा पीढ़ी अपनी उत्तराखंडी बोली बोलना नहीं जानती और ना ही उनकी बोलने में कोई रुचि नज़र आती है।

#हास्यकार्य से जुड़ने की प्रेरणा

अपनी संस्कृति के लिए कुछ करना व उसे जीवित रखने के जुनून ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है । लोग अलग  अलग हुनरों व  तरीक़ों के साथ समाज में कुछ ना कुछ करते आए है मुझ में हास्य कला थी मैंने अपनी इस कला का उपयोग अपनी संस्कृति व बोलिभाषा के संरक्षण में उपयोग करने की सोची। आज की पीढ़ी इंटर्नेट से सबसे अधिक जुड़ी है विड़ीयो के माध्यम से मैंने और मुझ जैसे संस्कृति प्रेमी मेरी टीम ने उत्तराखंड से सम्बंधित विभिन्न विषय पर छोटे छोटे हास्य वीडियो बनाने शुरू किए। लोगों के चेहरों पर मुस्कुराहट लाना और संस्कृति से जोड़े रखने की ख़ुशी ही मेरी प्रेरणा का श्रोत है।

#अन्य क्षेत्र में कार्य

उत्तराखंडी हास्यकार्य के अलावा ‘ भगवान चंद ‘ जी ने हिन्दी , पंजाबी जैसी फ़िल्म क्षेत्र में भी बतौर कलाकार कार्य किया हैं जहाँ उन्होंने ४६ लघु फ़िल्मों में कार्य किया है। वही यूट्यूब पर उनके अपने भी चैनल है जिनके नाम इस प्रकार है रंतरैबार , उत्तराखंडी आवाज़ । इसके अलावा उन्होंने ” नेकीं की दीवार ” के नाम से किए जाने वाले कार्य में जुड़ कर पंजाब के लुधियाना शहर में कई ज़रूरतमंद लोगों की निस्वार्थ भाव से सहायता करके इंसानियत को जीवित रखना का कार्य किया है ।

#उद्देश्य

‘ भगवान चंद ‘ जी कहते हैं। जिस प्रकार अन्य राज्यों के लोग अपनी संस्कृति, बोलिभाषा  सभ्यताओं के प्रति प्रेमी है। उसी प्रकार उत्तराखंड का हर एक उत्तराखंडी देश विदेश के किसी भी कोने में रह कर गर्व से अपनी भाषा को अपनाए व अन्य भाषाओं की भाँति ही उत्तराखंड की भाषा भी दुनिया के समक्ष अपनी एक पहचान बनाने में सक्षम हो ।

 

#दर्शकों से अनुरोध व अपेक्षा

अपने तमाम दर्शको व शुभचिंतको से ‘ भगवान चंद ‘ जी का बस इतना अनुरोध है जिस प्रकार सभी ने उनका अभी तक साथ दिया है उसी तरह सभी आगे भी उनका साथ देते रहे । अपेक्षा केवल इतनी है की गर्व से अपनी उत्तराखंडी भाषा संस्कृति को आने वाली पीढ़ी के लिए संरक्षित करके रखे।

इस वीडियो के माधयम से आप उनकी हास्यकला का अनुमान लगा सकते हैं।

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