इसी विशालकाय पहाड़ी में छिपा है कलयुग के अंत का रहस्य।

उत्तराखंड का नाम सुनते ही मन में आस्था और प्राकृतिक मनोहक दृश्य सामने आते हैं। राज्य में आस्था और प्रकृति को सामने महसूस करने के लिए देश-विदेश से पर्यटकों का यहां पर आगमन होता है। अपनी मनमोहक छटा और 33 करोड़ देवी-देवताओं के निवास स्थल होने के कारण यह पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसी राज्य में बसी हुई है आर्श्चजनक रहस्यों से भरी गुफा जो पाताल भुवनेश्वर के नाम से विश्व विख्यात है.

 

पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट कस्बे में पाताल भुवनेश्वर गुफा वहां पर मौजूद एक विशालकाय पहाड़ के 90 फीट के अंदर बनी हुई है। यह गुफा आस्था के साथ-साथ सैलानियों के लिए के लिए एक आकर्षण का केंद्र भी बनी हुई है। भगवान गणेश के भक्तों के लिए यह गुफा आस्था का अद्भुत केंद्र है.

#रहस्यों से भरी है पाताल भुवनेश्वर गुफा

इसी कड़ी को आगे जोड़ते हुए बात करते हैं राज्य के सबसे खूबसूरत जिले में शुमार पिथौरागढ़ की जी हां इसी जिले के गंगोलीहाट शहर में पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर न केवल लोगों के लिए आस्था का विषय बना हुआ है। वरना यहां पर चारों युगों (सतयुग, द्वापरयुग, त्रेता युग और कलयुग ) के आरंभ से अंत होने का रहस्य भी छिपा हुआ है। इस गुफा में चारों युगों के प्रतीक के रूप में चार पत्थर मौजूद हैं, कहा जाता है कि जिस तरीके से कलयुग रुपी पत्थर धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है और जिस दिन ये गुफा की छत से टकरा जाएगा उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा.

#यँहा विराजमान है गणेशजी का कटा मस्तक

 

हिंदू धर्म में भगवान गणेशजी को प्रथम पूज्य माना गया है और उनके जन्म के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने क्रोधावश गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया था, जिसके बाद से माता पार्वती को काफी दुख हुआ और उनके कहने पर ही शिवजी ने भगवान गणेश को हाथी का सिर लगाया था। लेकिन गणेश जी का असली सिर जो कि भोलेनाथ ने धड़ से अलग कर दिया था उसे उन्होंने इसी गुफा में रख दिया था. इसके बाद भगवान शिव ने 108 पंखुड़ियों वाले ब्रह्मकमल की स्थापना की, इसी  ब्रह्मकमल से पानी भगवान गणेश के शिलारूपी मस्तक पर टपकती है.

पाताल भुवनेश्वर गुफा अपने आगोश में कई रहस्यों को समेटे हुए है, ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने अपने नागों के पानी पीने के लिए यहां एक कुंड की स्थापना की थी जिसकी देखरेख का जिम्मा एक गरुड़ ने उठाई थी। इतना ही नहीं इस गुफा में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास है और इसी गुफा में उन सभी के प्रतिमाएं मौजूद हैं जो यहां आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.

 

#गुफा का वर्णना स्कंदपुराण में है 

इस गुफा को लेकर स्कंदपुराण में जो वर्णन है वह भी अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं है, स्कंदपुराण के अनुसार भगवान शिव स्वंय इस गुफा में विराजमान रहते हैं और बाकी सभी देवी देवता उनकी पूजा करने यहां आते हैं। इसी पुराण में बताया गया है कि त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्ण जब एक जंगली हिरण का पीछा करते हुए इस गुफा में आ गए थे तो उन्होंने इस गुफा के अंदर महादेव शिव सहित 33 कोटि देवताओं के साक्षात दर्शन किए थे.

#गुफा में मौजूद है केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ

इतना ही नहीं इस गुफा में भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु जी की भी मूर्तियां हैं और गुफा की छत पर बने एक छेद से इन तीनों मुर्तियों पर बारी-बारी पानी टपकता है। भगवान शिव की जटाओं के दर्शन भी इस गुफा में होते हैं, इसी रहस्यमयी गुफा में केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं। पाताल भुवनेश्वर गुफा में कालभैरव की जीभ के दर्शन भी होते हैं और इसको लेकर ऐसी मान्यता है कि मनुष्य कालभैरव के मुंह से गर्भ में प्रवेश कर पूंछ तक पहुंच जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.

लेखक: मनोज जोशी

Manoj Joshi

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