‘ पंचमुखी मंदिर ‘ जहाँ आज भी विराजमान है पंचदेव्यशक्तियां

देव्यशक्तियों व देवभूमि के रूप में प्रसिद्द्ध उत्तराखंड के कई प्राचीन मंदिर आज भी अपने पौराणिक व चमत्कारी शक्तियों के लिए जाने जाते है। ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर जो की उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के ‘ ब्रम्हखाल ‘ नाम स्थान पर स्तिथ है। इस मंदिर को ‘ पंचमुखी मंदिर ‘ नाम से जाना जाता है।

‘ पंचमुखी मंदिर ‘ जानकारो की माने तो इस मंदिर का इतिहास कई सौ वर्षों प्राचीन है। इसी के साथ ही मंदिर के निर्माण के पीछे भी चमत्कारी देव्यशक्तिया जुड़ी हुई । मंदिर के पुजारी ‘ सत्यप्रकाश भट्ट ‘ जी का कहना है इस मंदिर के पूर्व मंदिर के आसपास के परिसर से पानी के प्रवाह की ध्वनि सुनाई दिया करती थी परंतु किसी को भी उस प्रवाहित पानी का स्रोत प्राप्त नही था। कुछ समय पश्चात जब गाँव वालो द्वारा ही गाँव में ही भव्य पूजा का आयोजन किया गया था, पूजा समापन के पश्चात जिस स्थान पर पानी के प्रवाह की आवाज़ सुनाई दिया करती थी उस स्थान पर प्रवाहित जल का खुदाई के दौरान स्रोत प्राप्त हुआ ।

#संकरी गुफ़ा में विराजमान है पंचदेवी देवता

ज़मीन की खुदाई के पश्चात गाँव वालों को बालिका के बताए गए स्थान पर संकरी गुफ़ा दिखाई दी जब गाँव वालों द्वारा गुफ़ा के भीतर जाया गया तो लोग आश्चर्यचकित रह गए क्यूँकि वाक़ई गुफ़ा के भीतर का दृश्य अद्भुत व अविश्वसनीय था। गुफ़ा की दीवारों पर गढी आकृतियाँ व आकार स्वयं अपने इतिहास को बयान कर रही थी। वही खोज के दौरान लोगों को मंदिर में ना केवल एक बल्कि पाँच देवी देवताओं की आकृतियाँ नज़र आई ।                                                                                                                                                  

#गुफ़ा की दीवारों पर उधृत है अलग अलग देव्य आकृतियाँ 

उस संकरी गुफ़ा के भीतर जैसे ही मैंने प्रवेश किया वहाँ के वातावरण में ठंडक का आभास हुआ। जिसके पश्चात गुफ़ा में स्तिथ पंडित जी द्वारा गुफ़ा की दीवारों पर बनी देवी देवता की आकृतियों का ज्ञान करवाया गया जिसमें की गणेश जी की सूँड़ , हनुमान जी का गद्दा , श्री कृष्ण जी के पैरों के छाप दिखाई देते है। वही दूसरी ओर भगवान शिव का शिवलिंग विराजमान है जिसमें ना जाने कितनी बार ‘ ॐ ‘ अक्षर अंकित नज़र आता है जो की श्रधालुओ को हैरत में डालने वाला अनुभव है इसी के साथ माँ पार्वती की प्रतिमा भी गुफ़ा के भीतर विराजमान है।

#शिवलिंग के नीचे पाया गया पानी का स्रोत

गुफ़ा की खोज के पश्चात गुफ़ा के अंदर स्थित शिवलिंग के नीचे निरंतर पानी प्रवाहित होता रहता है । जानकारो का कहना है यह स्रोत वही है जिसका गुफ़ा मिलने के पूर्व केवल आभास हुआ करता था। इस पानी का प्रवाह शिवलिंग से होता हुआ गुफ़ा से बाहर को निकलता है।

 

#दर्शन के लिए है सीमित अनुमति

यू तो जब से लोगों को इस मंदिर के विषय में जानकारी मिली है लोग दर्शन हेतु इस मंदिर में आते रहते है परंतु पुजारियों द्वारा दर्शन हेतु सीमित अनुमति ही दी जाती है इसके पीछे कारण है गुफ़ा की संकरी व कठिन प्रवेश जहाँ से एक समय में अधिक श्र्धालुओ को एक साथ प्रवेश देना मुश्किल है । साथ ही ज़मीन से भीतर बनी इस गुफ़ा के संकरे होने के कारण साँस लेने में दिक़्क़त जैसी समस्या भी महसूस की जाती है इस लिए  एक समय में यहाँ ५ से ६ श्रधालुओ को ही अनुमति दी जाती है।

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