इस लेख के माध्यम से में अपना एक सुझाव आप सभी के साथ साँझा कर रही हूँ और वह सुझाव है विलेज टूरिज़्म (Village Tourisum ) विषय से सम्भंधित। मैं उत्तराखंड राज्य से हूँ और यह एक पहाड़ी राज्य होने के साथ ही प्राकृतिक ख़ूबसूरती से परिपूर्ण राज्य है, परंतु दुर्भाग्यवस वर्तमान समय में हमारा यह राज्य रोज़गार व अन्य सुविधाओं के अभाव के चलते पलायन की मार झेल रहा है। ऐसे में ज़रूरत है अधिक से अधिक स्वयं रोज़गार उत्पन्न करके लोगों को स्ववालंबि बनाने की जिसके लिए विलेज़ टूरिज़्म ( village tourisum ) से अच्छा पर्याय शायद ही कोई होगा। विलेज टूरिज़्म के बारे में तो आपने सुना ही होगा तो जानते है मेरे अनुसार पहाड़ों में ‘ विलेज टूरिज़्म ‘ कैस रोज़गार के लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकते है और कैसे इसे बढ़ावा दिया जाए।

बड़े बड़े जानकार व विशेषज्ञों की माने तो यदि किसी देश की विकास स्थिति जानना हो तो यह देखा जाता है कि उस देश की जन आबादी की ‘ जीवन शैली ‘ कितनी संपन्न व समृद्ध है साथ ही उस देश की परम्पराएँ व इतिहास कितना प्राचीन व संरक्षित है। ऐसे में यदि बात ‘ भारत ‘ यानी हमारे देश की जाए तो यहाँ की ६० से ७० प्रतिशत जन आबादी आज भी ग्रामीण भागो में रहती है और आज भी यदि कोई वास्तविक रूप में भारत की संस्कृति, परंपराओं को गहराई से जानना चाहे तो उसे जानने के लिए उन्हे भारत के ग्रामीण भागो में रह कर उन्हें समझना व अनुभव करना होगा। परंतु अफ़सोस आज हमारे देश की अधिकतर आबादी भुखमरी, बेरोज़गारी, लाचारी में जीवन जीने को मजबूर है। लोग बड़ी तादाद में गाँवों क़स्बों से बेहतर जीवनशैली के लिए बड़े बड़े शहरो की ओर पलायन कर जाते है परंतु इस समस्या के लिए ‘ विलेज टूरिज़्म ‘ एक ऐसा माध्यम व व्यवसाय है, जिससे ग्रामीण व पहाड़ी इलाक़ों से पलायन रोका जा सकता है।

‘ विलेज टूरिज़्म ’ (Village Tourisum) के फ़ायदे :

१ : वर्तमान समय में उत्तराखंड पलायन की मार झेल रहा है गाँव के गाँव ख़ाली हो चुके है ऐसे में ज़रूरत है उन पारम्परिक पुराने घरों को उत्तराखंडी प्राचीन हस्त कलाओं से पुनः सुसज्जित किया जाए और उन्हें पर्यटकों के आवास के लिए उपलब्ध करवाया जाए।

२ : पहाड़ी भोजन बेहद स्वस्थवर्धक होते है जिसका कारण है यहाँ फ़सलो व सब्ज़ियों की पैदावार पूर्ण रूप से जैविक तौर से की जाती है। ‘विलेज टूरिज़्म ‘  के तहत आने वाले पर्यटकों को जैविक खेती का महत्व व फ़ायदे  विस्तार में बताए जा सकता है इसी के तहत पहाड़ी भोजन को मुख्य तौर से बढ़ावा मिलेगा ।

३ : राफ़्टिंग, बंजी जम्पिंग, काइऐकिंग, माउंटेन बाइकिंग, रॉक क्लाइमिंग, रपेलिंग इत्यादि साहसिक खेलो के लिए उत्तराखंड व पहाड़ी क्षेत्र उपयुक्त होते है। आज की युवा पीढ़ी रोमांचक व साहसिक खेल मनोरंजन के तौर पर खेलना पसंद करती है। ऐसे में इन खेलो को बढ़ावा देते हुए पर्यटकों को उत्तराखंड व पहाड़ी क्षेत्रो की और आकर्षित किया जा सकता है।

४ : ग्रामीण व पहाड़ी इलाक़ों में ‘विलेज  टूरिज़्म ‘ मुहिम यदि पूर्ण रूप से सफल होते है तो उन ग्रामीण भागो में परिवहन, संचार व स्वस्थ जैसी सुविधाओं के स्तर में भी सुधार होगा।

Bungee jumping in rishikesh is the best professionally maintained adventure sports.

५:  ‘ विलेज टूरिज़्म’ के माध्यम से ‘ पर्यटन ‘ को बढ़ावा मिलेगा जिससे लोगों को अधिक से अधिक रोज़गार प्राप्त होगा साथ ही राज्य की आर्थिक आय में भी वृद्धि होगी।

६: यह एक ऐसा माध्यम है जिसके ज़रिए ग्रामीण व पहाड़ी इलाक़ों में रहने वाले हर तख़्ते के स्थानीय निवासी को स्वावलंबि बनने का अवसर प्राप्त होगा ।

७:  ग्रामीण क्षेत्र रहवासियो में हस्तकलाओं, हस्तशिल्प, बुनकर, दस्तकारी जैसी कई उत्पादों को बनाने की कलाएं होती है परंतु कोई बढ़ा मंच ना मिल पाने के कारण यह कलाएं व हुनर लुप्त हो जाते है इसलिए ज़रूरत है ‘विलेज टूरिज़्म ‘ के माध्यम से उन कलाओं व हुनरो को एक नया मंच दिया जाए।

८ : भारत के हर राज्य की अलग अलग संस्कृति, सभ्यता व परम्परायें व खानपान है। लोगों तक अपनी संस्कृति सभ्यता व खानपान को पहुँचाने का यह एक बेहतरीन विकल्प है। यह एक ऐसा ज़रिया है जिसके माध्यम से देश विदेशों के सैलनियो तक भारत की सभ्यता व संस्कृति को पहुँचाया जा सकता है।

विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड जिले के रुद्रप्रयाग में मौजूद लालूरी गाँव ने काफी अच्छी पहल कि है जिसको आपको निचे दिए वीडियो के माध्यम से देख सकते हैं।

इस विषय पर आपके क्या सुझाव है कॉमेंट के माध्यम से हमारे साथ ज़रूर साँझा करे ।।

Sharing is caring!