‘ संघर्ष ‘ यह जीवन का वह दौर होता है जो अक्सर इंसान से बहुत कुछ छीन लेता है और ऐसे समय में अधिकतर लोग हार मान जाते है ,परंतु यक़ीन मानिए दोस्तों जो इस दौर को ईमानदारी व दृढ़ता से पार कर लेता है उसे दुनिया में सफल होने से कोई नही रोक सकता। यह लेख ऐसे ही एक शख्स को सम्बोधित करता है, जिन्होंने कई संघर्षो व कठिन समय से लड़ कर आज अपनी एक पहचान बनाई है और मुझे यक़ीन है उनकी यह जीवनी आप सभी को भी प्रोत्साहित करेगी।

उत्तराखंड के चम्पावत जिले के सिंगदा गाँव में जन्मे बी. के सामंत जी की जीवनी किसी ८० या ९० दशक की फ़िल्म से कम नही है। बी.के सामन्त जी के स्वर्गीय पिता जी फ़ौज के एक सिपाही थे जिन्होंने निडरता व साहस से हमेशा अपना जीवन देश की सेवा में जिया और वो सन् १९६५ व १९७१ की दो लड़ाइयों में जब वे विजयी होकर लौटे थे, तब उन्हें २ मेडल्स से सम्मानित किया गया था । बी. के जी अपने पिता से बेहद प्रेम करते थे परंतु दुर्भाग्यवस १० वर्ष की आयु में ही उनके पिता का अकस्मात् देहांत हो गया। उनका कहना है पिता की मृत्यु के बाद से ही उनके संघर्षिल जीवन की शुरूवात हो चुकी थी। स्कूल के दिनो से से ही उन्हें घर में आर्थिक मदद करने हेतु नौकरी करनी पड़ी थी ,कभी पत्थर रोड़ियाँ ढोए, कभी होटल्स में बर्तन धोए, तो कई बार भूखे भी सोए हालात संघर्षिल थे परंतु बी.के जी अपना जीवन यूँही व्यर्थ नहीं जाना देना चाहते थे, फिर क्या था क़यामब होने की चाह से वे अपना गाँव परिवार छोड़ दिल्ली की और निकले कुछ वर्षों दिल्ली में छोटे मोटे काम किए और फिर सफ़र मुंबई की और बढ़ा। मुंबई जहाँ वे बिल्कुल अनजान थे और इसी बीच आर्थिक तंगी के कारण उन्हे ३ राते स्टेशन के एक कोने पर सो कर गुजरनी पड़ी थी। सस्ते खाने की तलाश में उन्हें अक्सर डेढ़ से दो घंटे पैदल चलना पड़ता था। वे संगीत क्षेत्र में अपनी एक पहचान बनाना चाहते थे इसी के चलते वे घंटो स्टूडियो के बाहर किसी बड़े संगीतकार के मिलने का इंतज़ार किया करते थे ,यह सब उनके लिए बिलकुल आसान नहीं था। बी .के सामन्त जी कहते है वे अपने उन संघर्षिल दिनो को कभी नहीं भूल सकते। परंतु आज स्तिथी व समय दोनो ही बदल चुके है कड़ी मेहनत व काम के प्रति सच्ची निष्ठा की बदौलत ही वे आज मुंबई स्थापित पृथ्वी लोजिस्टिक्स कम्पनी के चेयरमैन व डायरेक्टर है। इस कंपनी की आज के समय में पूरे देशभर में ३७ ब्राँचेस है।

संगीत से जुड़ाव:-

सामन्त जी के अनुसार संगीत से उनका जुड़ाव काफ़ी पुराना है वे काफ़ी समय पूर्व से संगीत के क्षेत्र में छोटे बड़े रूप से सहभागी रहे है। यहाँ तक कि वे ‘ टी सीरिज़ ‘ जैसी बड़ी संगीत कम्पनी के लिए भी अपने तीन गीत दे चुके है। इस के अलावा टाइम्स म्यूज़िक के साथ मिलकर वे एक बॉलीवुड सॉंग कर चुके है जिसका शीर्षक है “तुझमें ही है मेरा जहाँ “ जो की काफ़ी हिट रहा। वर्तमान में सामंत जी संगीत से जुड़े बॉलीवुड के महान संगीतकार ‘ ललित पंडित ‘जी  व ‘ असलम कई ‘ जी के साथ काम कर रहे है इसी के साथ उन्होंने उत्तराखंड संगीत को भी एक ऊँचे मुक़ाम पर ले जाने के लिए काम शुरू कर दिया है।

उत्तराखंडी संगीत विषयी योजनाएँ:

बी.के सामंत जी का मानना है कि उत्तराखंडी संगीत को पहाड़ों से बाहर निकाल कर अन्य भाषी संगीत की भाँति एक पहचान दिलवानी है। साथ ही उत्तराखंड की ख़ूबसूरती का सही चित्रण किया जाना ज़रूरी है ताकि लोग सुंदर गीतों के साथ उत्तराखंड की प्राकृतिक ख़ूबसूरती भी देख सके। इससे उत्तराखंड पर्यटन में भी वृद्धि होगी। मैं और मेरी टीम ने ऐसा ही कुछ प्रयास किया है अब तक हम तीन उत्तराखंडी गीत यूट्यूब पर दर्शा चुके है, जिनके नाम है ‘ मेरो पहाड़ा ‘ ‘ डोली ‘ व ‘ मेरु भिमु ‘ इसके अलावा अगला गीत ‘ डोर तेरी ‘ २० जुलाई को हमारे यूट्यूब चैनल ‘ SHREEKUNWAR ENTERTAINMENT ‘ पर रिलीज़ किया जाएगा।

पुरुष्कार व श्रोताओं से निवेदन:-

यह मेरे व मेरी पूरी टीम के लिए सौभाग्य की बात है कि हमारे पहले उत्तराखंडी गीत ‘ मेरो पहाड़ा ‘ को बैंगलोर में हुए शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल शो में बेस्ट फोक म्यूज़िक आँफ ज़ूरी का अवार्ड जीता है। उम्मीद है आगे ऐसे कई अवार्ड हासिल होंगे यदि आप सभी दर्शकों व श्रोताओं का प्यार यूँ ही मिलता रहे तो।

सामंत जी कहते है की मेरा तमाम उत्तराखंड संगीत प्रेमियों से निवेदन है की आप सभी अपना आशीर्वाद व प्यार बनाए रखे यही प्यार व आशीर्वाद हमें भविष्य में भी बेहतर काम करने हेतु प्रोत्साहित करता रहेगा।

इन गीतों की विशेषताएँ:-

यो मेरो पहाड़ा, डोली, व मेरी भिमु के नाम से चर्चित उत्तराखंडी गीत की विशेषता यह है की इन गीतों में उत्तराखंड की ख़ूबसूरती को बख़ूबी दर्शाया गया है इन गीतों की शूटिंग उत्तराखंड के अलग – अलग ख़ूबसूरत जगहों पर जैसे की चंपावत, पिथौरागढ़, चमोली, बगेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल में की गई है। साथ ही इन गीतो को B.K. Samant (बी.के सामन्त) जी द्वारा लिखा व बहुत ही ख़ूबसूरती से गाया गया है। उम्मीद है आप सभी को भी यह गीत ज़रूर पसंद आयेंगे। इन गीतों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया like// comment ✍🏻// share के माध्यम से अवश्य दे।।

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धन्यवाद
     लेखिका- विकिता भट्ट

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