इस लेख के माध्यम से भारत के दो पहाड़ी राज्य ‘ उत्तराखंड ‘ व ‘ हिमाचल प्रदेश ‘ से जुड़े अलग -अलग विषयों को आप सभी के समक्ष रखने का प्रयास किया जा रहा है ताकि आप स्वयं यह अनुमान लगा सके की दोनो राज्यो का किस स्तर पर विकास हो रहा है और किस प्रकार ये दोनो राज्य पहाड़ी होने के बावजूद एक दूसरे से भिन्न है।

( १ )  हिमाचल व उत्तराखंड राज्य की स्थापना

॰ हिमाचल : वर्ष १९५० को हिमाचल प्रदेश को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था, परंतु कुछ वर्षों बाद १९७१ को हिमाचल राज्य अधिनियम के तहत ‘ हिमाचल ‘ राज्य को १८ वे राज्य के रूप में घोषित किया गया।

॰ उत्तराखंड : ९ नवम्बर २००० को उत्तराखंड के अनेको आंदोलनकारियों द्वारा कड़े संघर्षो के बाद अलग राज्य की माँग पूरी करवाई गई और भारतीय गणराज्य में २७ वी राज्य के रूप में उत्तराखंड राज्य को उत्तरप्रदेश राज्य से विभाजन प्राप्त हुआ। यह राज्य वर्ष २००० से २००६ तक ‘ उत्तरांचल ‘ के नाम से जाना जाता रहा परंतु वर्ष २००७ को इस नाम को बदल कर ‘ उत्तराखंड ‘ घोषित कर दिया गया।

( २ )  कृषि व राज्य की अर्थव्यवस्था निर्भरता

॰ हिमाचल : १२ माह प्रवाहित नदियों के कारण यह राज्य दिल्ली , राजस्थान व पंजाब जैसे राज्यों को पनबिजली बेचता है। इसके अलावा कृषि व्यापक जलवायु होने के कारण यह की आबादी के ६९% लोग कृषि व बाग़वानी व अन्य व्यवसाय से जुड़े है। बाग़वानी के माध्यम से हिमाचल में उगने वाले ‘ सेब’ पूरे भारत में प्रसिद्ध है। ‘ पर्यटन ‘ भी हिमाचल के लोगों की ‘ आय ‘ का मुख्य साधन है।

॰ उत्तराखंड : ‘ टिहरी बाँध ‘ एशिया का सबसे बड़ा बाँध है व विश्व में इस बाँध का पाँचवा स्थान है। पनविधुत परियोजना में भी इस बाँध का अच्छा योगदान है। इसके अलावा यहाँ की लगभग ९०% आबादी कृषि पर निर्भर है। फ़िलहाल अब हथकरघा, हस्तशिल्प जैसे कार्यों के लिए भी सरकार द्वारा पहल की जा रही है। ‘ पर्यटन ‘ उत्तराखंड की ‘ आय ‘ का साधन तो है परंतु अब भी इसमें काफ़ी सुधार करने की आवश्यकता और साथ ही सरकार द्वारा पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई स्तर पर विकास करने की आवश्यकता है।

( ३ )  भाषाएँ व उनके प्रति लगाव

॰ हिमाचल : हिमाचल में मुख्य रूप से पहाड़ी कांगड़ी, डोगरी व पंजाबी भाषाएँ बोली जाती है। पहाड़ी राज्य होने के बावजूद यहाँ के पहाड़ों में जन आबादी सामान्य है, साथ ही यहाँ के लोग बोलचाल के लिए गर्व से अपनी बोली भाषाओं का प्रयोग करते है। 

॰ उत्तराखंड : उत्तराखंड में मुख्य रूप से गढ़वाली, कुमाऊँनी व जौनसारी भाषा बोली जाती है। अफ़सोस हिमाचल की तुलना में उत्तराखंड के पहाड़ी जन आबादी स्तिथी निराशजनक है। पलायन की मार झेल रहे उत्तराखंड के ग्रामीण इलाक़े वीरान होते जा रहे है वही दूसरी और शहरो में बस चुकी जिसके परिणाम स्वरुप उत्तराखंड युवा पीढ़ी अपनी उत्तराखंड बोली को अपनाने व बोलचाल के प्रयोग करने में भी शर्मिंदगी महसूस करती है जो की उत्तराखंड संस्कृति के लिए एक बेहद चिंता का विषय है।

( ४ )  दोनो राज्यों की साक्षरता स्तिथी

॰ हिमाचल : एक साक्षरता सर्वे प्रमाण के अनुसार यह जानकारी प्राप्त हुई है की ‘ हिमाचल ‘ देश का पहला ऐसा राज्य है जहाँ ‘ प्राथमिक शिक्षा ‘ मुहिम पूर्णरूप से सफल हुई है।

॰ उत्तराखंड : वर्ष २०११ के ‘ उत्तराखंड सर्वे ‘ के अनुसार उत्तराखंड सरकार कुल आय का ६७८७ करोड़ ख़र्च शिक्षा पर करती है , परंतु आज भी उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रो में शिक्षा का हाल बेहद निराशजनक है। साथ ही प्रशिक्षित शिक्षकों, कारगर शिक्षा प्रणाली व बुनियादी मूलभूत ज़रूरत के अभाव के कारण लोग बड़ी तेज़ी से पलायन कर शहरो की तरफ़ बसते जा रहे है।

( ५ ) परिवहन सेवा व सड़क स्तिथी

॰ हिमाचल : सड़के इस राज्य की परिवहन सेवा व यातायात का मुख्य माध्यम है। वर्ष १९४८ में यहाँ केवल २८८ किलोमीटर लम्बी सड़के थी, परंतु वर्ष २००७ में इसका विस्तार करके ३०,२६४ किया गया। पहाड़ी राज्य होने के कारण मानसून में भूस्खलन जैसी समस्यो के चलते कई बार यहाँ सड़के बाधित हो जाती है।

॰ उत्तराखंड : उत्तराखंड में पक्की सड़के २१.४१० किलोमीटर है।लोक निर्माण द्वारा निर्मित सड़के १७,७७२ किलोमीटर और स्थानीय निवासियो द्वारा ३,९२५ किलोमीटर सड़के बनाई गई है।मानसून में यहाँ भूस्खलन जैसी समस्या उत्पन्न होती है।

( ६ ) पर्यटन आकर्षण

॰ हिमाचल : प्राकृतिक ख़ूबसूरती हिमाचल को ईश्वर से तोफे में मिली है। पर्यटन हिमाचल सरकार व वहाँ के लोगों की आय का बड़ा साधन है ,तभी तो हिमाचल सरकार राज्य विकास निगम पर्यटन विकास में कुल आय का १० % योगदान देती है। इसके साथ ही मूलभूत सुविधाएँ जैसे सड़के, हवाई यातायात, संचार, स्वास्थ्य, जलपूर्ती इत्यादि सेवाएँ शामिल है। धर्मशाला, कुफ़री, चंबा घाटी, डलहौज़ी, मनाली, शिमला इत्यादि स्थान हिमाचल में पर्यटन की दृष्टि से पर्यटको की पहली पसंद है।

॰ उत्तराखंड : देवभूमि उत्तराखंड हिंदू आस्था के मुख्य तीर्थस्थल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री जैसे पवित्र धाम से प्रतिभासंपन्न है। इसी के साथ उत्तराखंड प्राकृतिक ख़ूबसूरती से भी परिपूर्ण राज्य है, परंतु राज्य के विकास को ध्यान में रखते हुए सरकार को अभी भी प्राथमिक व मूलभूत सुविधाओं पर कई सुधार करने की आवश्यकता है। इसके अलावा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री , हेमकुण्ड साहिब, नानकमत्ता, तीर्थस्थानो के अलावा फूलो की घाटी, मसूरी, लैंसीडाऊन, बागेश्वर, औली इत्यादि स्थान पर्यटकों की सैर सपाट की के लिए उपयुक्त पर्याय है।

उम्मीद है आपको यह लेख पसंद आया होगा। आप भी इस विषय पर अपनी राय हमें कॉमेंट के माध्यम से अवश्य दे ।।

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