क्यों ना कुछ क्षणो के लिए अपनी आँखें बंद करके यह अनुभव किया जाए की हमारे जीवन के नए दिन की शुरूवात पक्षियो  की चहचहाट से हो, खिड़की के झरोको से बाहर देखते ही आँखो के समक्ष हरे भरे पेड़ पौधे से भरें पहाड़ नज़र आए ,जहाँ की हवाओ में मिट्टी की शोंधि शोंधि महक बसी हो । दुनिया में ऐसी कई जगांहे है जो मानव के लिए ईश्वर की ख़ूबसूरत देन है, परंतु हम वही लापरवाह मनुष्य है जो इन खूबसूरत तोफ़ो की हिफाजत नहीं करना जानते बल्कि उन्हें नष्ट करते जा रहे है।

#आस्था के साथ प्रदूषण को निमंत्रण

आस्था के नाम पर हो रहे जल प्रदूषण से हम भली भाँति वाकिफ तो है परंतु आस्था की आड़ में इस में कोई सुधार नहीं करते। वर्षों से चलती आ रही गंगा स्नान व पूजा सामग्री को पूजा समाप्ति पर गंगा व अन्य नदियों में प्रवाह कर देना भला किस हद तक सही है। इतना ही नहीं बल्कि कई बार तो गंगा, हरिद्वार और काशी जैसे स्थानो पर मोक्ष के नाम पर नदियों में मृत व्यक्तियों को भी प्रवाहित कर दिया जाता है। आखिर कब तक इस प्रकार अंधविश्वास के नाम पर हम पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते रहेंगे। अब तो आलम यह है कि पहाड़ों से निकल कर समतल भागो में पहुँच कर आने वाली गंगा की सह्यनदी यमुना पवित्र नदी से नाले में तब्दील हो चुकी है। शहरों में आकर इस नदी में केवल मलमूत्र व गंदगी के अलावा कुछ नहीं रह गया है। यदि आधुनिकता के शब्दों में इसे आस्था कहते है तो मैं नाश्तिक रहना पसंद करूँगी।

#सैरसपाटा प्रकृति को क्षति किए बिना

सैरसपाटा के लिए हम हज़ारों लाखों रुपए खर्च करके दूर देश विदेश के कोने कोने में जाते है पर वहाँ जाकर हम से  ९८% लोग अपनी उस स्थान की ख़ूबसूरती को बरक़रार रखने की ज़िम्मेदारी से पलड़ा झाड़ लेते है। सैरसपाटा के दौरान खानपान के बाद बचे व्यर्थ वस्तुओं को यूंही उसी स्थान पर छोड़ देना। मदिरा पान के बाद ख़ाली बोत्तले छोड़ देना। धूम्रपान पश्चात् उसे ऐसी ही कही भी फेंक देना। यह सभी लापरवाही किसी भी ज़िम्मेदार इंसान द्वारा होना काफ़ी दुखद है ।

 

 

 

#कचरे का सही विघटन

बढ़ती आबादी के साथ कचरे का सही विघटन करना सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। जहाँ बड़े बड़े शहरों में इसके लिए कई परियोजनाएँ बनाई गई है तो वही कई शहरो का हाल बेहद निराशजनक है। अलग अलग शहरो से प्रतिदिन लाखों टन कचरे का ढेर इकट्ठा होता है इनका सही विघटन होना आवश्यक है। इन कूड़ों के साथ ही कई बीमारियाँ को भी निमंत्रण मिलता है। सूखे और गिले कचरे का विभाजन करके उनका सही विघटन व उसका पुनरावर्तन किया जाना आवश्यक है। कचरा यह आज एक बेहद गम्भीर समस्या है, वक़्त रहते इस विषय पर ध्यान देना ज़रूरी है वरना वो दिन दूर नहीं जब मनुष्य स्वयं कूड़े के ढेर से घिरा होगा।

#सुधार व बदलाव

समय के साथ -साथ सरकार द्वारा कूडे कचरे के विघटन की अलग अलग नीतिया बनाई गई है। परंतु लाखों करोड़ों पैसे ख़र्च करने के बाद भी यह सारी नीतिया असफल नज़र आती है क्यूँकि स्वछता केवल सरकार की ही नहीं बल्कि हम सब की नैतिक ज़िम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति स्वछता के प्रति अपनी -अपनी ज़िम्मेदारी अच्छे से निभाए तो भविष्य में हम अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वातावरण की सौग़ात दे सकते है। हर व्यक्ति यदि अपने जीवन के हर वर्ष यदि एक वृक्ष भी लगाए तब भी यह प्रकृति के लिए सुंदर तोफा होगा। हमें अपनी प्रकृति व पर्यावरण के प्रति बढ़ती लापरवाही को सुधारना होगा साथ ही साथ प्रत्येक़ व्यक्ति को बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रण करते हुए बढते प्रदूषण के प्रति जागरूक हो कर पर्यावरण के प्रति अपने निष्क्रिय रव्ये को बदलकर सजग होना आवश्यक है।

इस वीडियो के माधयम से आप पर्यावरण संरक्ष्णा (जल प्रदूषण) की तरफ किए गए प्रयास को देख सकते हैं।

अपनी राय नीचे COMMENT के माध्यम से अवश्य दें कि पर्यावरण संरक्ष्णा के लिए क्या उपयुक्त कदम उठा सकते है और आप सभी से अनुरोध है कि अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखें क्यूंकि ये हम सब का नैतिक कर्त्तव्य है।  🙏🏻धन्यवाद 🙏🏻 -विकिता भट्ट

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