हम उत्तराखंडी इस प्रकार मानते है उत्तरैणी ( मकरसंक्रान्ति) पर्व

भारतवर्ष में मकरसंक्रांति के नाम से जाने जानेवाला पर्व , जहाँ हिंदुओ द्वारा नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है । वही यह पर्व उत्तराखंड में ‘ उत्तरैणी ‘ के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचाग व ज्योतिषी के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य देव का शनि में प्रवेश होता है। शनि देव को ‘ मकर राशि ‘ का स्वामी माना जाता है इसलिए इस दिन को मकरसंक्रान्ति नाम दिया गया । हिंदू नव वर्ष की शुरूवात के रूप में मकरसंक्रान्ति के पर्व को भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग अलग अन्दाज़ से मनाया जाता है। जहाँ मकरसंक्रान्ति पर्व के अवसर पर लोगों द्वारा घरों की छतों पर पतंग उड़ाई जाती है तो कुछ लोगों द्वारा इस अवसर पर मीठे पकवान बना कर लोगों में बाँटे जाते है। उसी तरह उत्तराखंड में भी इस पर्व को मनाने का अन्दाज़ ही निराला है।

#उत्तरैणी मनाने का पहाड़ी अन्दाज़

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सम्पूर्ण उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड के बीच उत्तरैणी पर्व मनाने की तैयारी  शुरूवात हो चुकी है। जहाँ पंतगो से व मिठाइयों से बाज़ार सज चुके है वही इस दिन ‘ १४ जनवरी ‘ (अर्थात कल) प्रातः काल से ही हरिद्वार, ऋषिकेश, व देवप्रयाग जैसे स्थानो पर लोगों की बड़ी भीड़ उमड़ती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है की इस दिन सूर्य उदय से पूर्व गंगा व अन्य नदियों में स्नान कर के सूर्य देव को जल अर्ग किया जाता है व पूजा साधना के बीच नववर्ष में सुखी समृद्ध जीवन की प्रार्थना की जाती है।

#मेले ( कौथिग ) की धूम

मेले( कौथिग ) वर्षों से उत्तराखंड संस्कृति से जुड़ा है। उत्तरैणी व नववर्ष के आगमन के अवसर पर (कौथिग ) मेले का आयोजन किया जाता है। मुख्य रूप से कौथिग आयोजित करने का कारण लोगों का मनोरंजन करना होता है , तो वही यह एक ऐसा माध्यम है जहाँ उत्तराखंड संस्कृति, व्यंजनो, वेशभूषा, व कलाकृतियों को एक साथ देखने का अवसर भी मिलता है। उत्तरकाशी व बागेश्वर में उत्तरैणी के अवसर पर आयोजित किए जाने वाले मेले ( कौथिग) सम्पूर्ण उत्तराखंड में सबसे चर्चित मेले मे सम्मलित है।

#ख़ास व्यंजन व पकवान

इस दिन उत्तराखंड के घर घर में विशेष रूप से चावल व कालीदाल की खिचड़ी बनाने की परम्परा है तो वही दूसरी और कुमाऊँ क्षेत्र में इस अवसर पर घर -घर में एक मीठा पकवान बनाया जाता है जिसे ‘ घुघुती ‘ कहा जाता है। उत्तरैणी के दिन ‘ घुघूती ‘ बना कर क़ौओ को खिलाया जाता है इसके पीछे यह धारणा है कि इस दिन क़ौओ को खिलाया गया भोग सीधे तौर पर हमारे पित्रो तक पहुँचता है।

#मोक्ष के रूप में पवित्र दिवस

ज्योतिषों व वेदों के अनुसार मकरसंक्रान्ति ( उत्तरैणी) का पर्व के दिन को अत्यंत पवित्र माना गया है । शास्त्रों के अनुसार इस दिन के मृतक व्यक्तियों की आत्माओं को सीधे ईश्वर के चरणो में स्थान प्राप्त होता है । दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इस दिन मरने वाले व्यक्तियों की आत्माओं को निश्चित ही मोक्ष प्राप्त होती है, विभिन्न कारणो से  इस दिन को बेहद पवित्र मानते हुए उत्तराखंड में इस दिन को उत्तरैणी पर्व के रूप में मनाया जाता है।।

आप सभी भी अपना मकरसंक्रांति में किए जाने वाले अनुभव को कॉमेंट के माध्यम से हमारे साथ साँझा करे ।। 🙏🏻धन्यवाद 🙏🏻 -विकिता भट्ट

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