पलायन का अर्थ है सुविधाओं का आभाव। जहाँ रोटी , कपड़ा ,मकान हर एक व्यक्ति की प्राथमिक ज़रूरत होती है तो वही इन ज़रूरतों के लिए मनुष्य ने वर्षों से संघर्ष किया है और इनकी खोज में वह लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक भटकता भी रहा है। छोटे छोटे गाँव क़स्बों से एक बेहतर कल, बेहतर जीवन के लिए लाखों की तादाद में लोग पलायन करते है। वर्तमान समय में उत्तराखंड भी पलायन की मार झेल रहा है आलम यह है की बड़ी संख्या में गाँव के गाँव ख़ाली हो चुके है। स्तिथी इतनी दुखद व चिंता जनक है की जिन घरों में कभी १० से १५ लोग एक साथ रहा करते थे वहाँ आज केवल घर के वृद्ध मुखिया बचे है। वृद्ध अवस्था जहाँ जीवन के इस पढ़ाव पर व्यक्ति आराम भरा जीवन जीने की इच्छा रखता है वहाँ इसके विपरीत उत्तराखंड के गाँवो में रह रहे बुज़ुर्ग अपने पहाड़ी संघर्षिल जीवनचर्या के सारे काम स्वयं करने को मजबूर है। एक बात ग़ौर करने वाली यह है की जैसे जैसे समय बदलता गया देश के अलग अलग राज्यों की भाँति उत्तराखंड में भी नेता व उनकी पार्टियाँ बदलती गई परंतु विचार करने वाली बात यह है की क्या अब तक उत्तराखंड के किसी राजनैतिक पार्टियों में या नेताओ में इतनी कबिलता या क्षमता नहीं है की वह अपने राज्य का सही विकास कर सके, पलायन जैसी गंभीर समस्या पर विराम लगा सके। नीचे लिखे गए मुद्दों पर यदि उत्तराखंड सरकार द्वारा गम्भीरता से सुधार कर दिया जाए तो पहाड़ों से हो रहे पलायन पर रोक लगाई जा सकती है।

१ रोज़गार : रोज़गार आज हर व्यक्ति की प्राथमिक ज़रूरत है। अपना और परिवार के भरणपोषण के साथ साथ छोटी बड़ी सभी ज़रूरतों के लिए पैसों की आवश्यकता होती। आज हर तक्खते का व्यक्ति अच्छे रोज़गार की अपेक्षा रखता है। सरकार द्वारा पहाड़ों में अलग अलग योजनाओं के तहत रोज़गार उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है। जिसमें व्यवसाय से जुड़े अलग अलग क्षेत्र जैसे शिक्षा, बैंक, तकनीक, निर्माण कार्यों, इत्यादियो में स्थानीय लोगों को रोज़गार उपलब्ध करवाया जाए साथ ही खेती के क्षेत्र को भी बढ़ावा देते हुए किसानो को सस्ते दरों पर बीज खेती उपयोगी उपकरण उपलब्ध कराए जाए इसी के साथ पशुपालन जैसे कार्यों से मिलने वाले दूध से किस प्रकार दुग्ध व्यवसाय किया जा सकता है इसके लिए किसानो को प्रशिक्षित करते हुए उन्हें स्वयं रोज़गार के लिए भी आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इसके अलावा शिक्षा से वंचित स्त्रियों को भी हस्तकरघा, हस्तशिल्प, जैसी कलाओं से प्रशिक्षित करते हुए स्वावलंबी बनाया जा सकता है।

२ शिक्षा : वर्तमान समय में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाक़ों में सरकारी स्कूलों की शिक्षा स्तिथी बेहद निराशजनक है । सरकारी स्कूलों का स्तर इतना गिर चुका है की लोग अब बिना मजबूरी के अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना तक नहीं चाहते । विध्यर्थियो के साथ-साथ समय-समय पर शिक्षकों को भी प्रशिक्षण मिलना आवश्यक है साथ ही भारतीय क़ानून में जाति के आधार पर हो रहे घोटालों को बंद करते हुए योग्य शिक्षकों का उनकी शिक्षा व क़ाबिलियत के आधार पर चयन किया जाना चाहिए। इससे शिक्षा प्रणाली स्तर में भी सुधार होगा।

३ स्वास्थ्य : बड़ी अफ़सोस की बात है की राज्य स्थापना के १७ वर्ष बीत जाने के पश्चात् भी आज भी उत्तराखंड के कई गाँव व स्थानीय निवासी स्वास्थ्य सम्भंधित सुविधाओं से वंचित रह जाते है तो कई बार गाँव व घरों से अस्पताल व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इतने दूरी पर होते है की मरीज को वहाँ तक पहुँचाने से पहले ही वे दम तोड़ चुके होते है। पिछले दिनो की उत्तराखंड जौनसार के त्योणी इलाक़े की ख़बर से तो आप अवगत ही होंगे जहाँ एक गर्भवती महिला ने इलाक़े के ही पुल पर बच्चे को जन्म दे दिया, मामले की जाँच में महिला व उनके परिजनो ने बताया जब वे महिला को लेकर नज़दीकी स्वास्थ्य केन्द्रालय पहुँचे तब वहाँ एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे।

४ परिवहन व संचार संयुक्तता : परिवहन व संचार एक राज्य को दूसरे राज्य से जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम है। पर्यटन की दृष्टि से उत्तराखंड के परिवहन व संचार में काफ़ी सुधार व नवीनीकरण की आवश्यकता है। राज्य के विकास में परिवहन व संचार इन दोनो माध्यमों का विकसित होना बेहद आवश्यक है। चूँकि हम मानते है पहाड़ों में बेहतर सड़क व कारगर परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाना किसी चुनौती से कम नहीं है परंतु बेहतर राज्य विकास के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण है। पर्यटको की दृष्टि से भी इन दोनो माध्यमों को सर्वप्रथम प्राथमिक दी जाती है इसीलिए समय समय पर सरकार द्वारा इनमे सुधार व दुरुस्ती होनी ज़रूरी है।

 

५ पर्यटन को बढ़ावा : उत्तराखंड की ख़ूबसूरती किसी स्वर्ग से कम नहीं है। साथ ही यही वह स्थान है जहाँ हिंदू आस्था के चारों मुख्य तीर्थस्थल बसे है। विश्वयोग केंद्र ऋषिकेश से भला कौन अवगत नही है यहाँ देश विदेश से सैलानी योग शिक्षा व मोक्ष की प्राप्ति के लिए आते है। ऐसे में ज़रूरत है पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन को और आकर्षक व सुविधाजनक बनाया जाए साथ ही युवा पीढ़ी की मनोरंजकता को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा स्थानीय निवासियो को पर्यटन को अधिक आकर्षक बनाने के लिए साहसिक खेलो को बढ़ावा देने के लिए सहायता करनी चाहिए तथा इन खेल सम्भंधित उपकरणो को उपलब्ध कराने में भी आर्थिक मदद करनी चाहिए। इस प्रकार राज्य के आय में भी वृद्धि होगी साथ ही स्थानीय लोगों को भी रोज़गार मिलेगा और तब कही जाके पलायन जैसी गम्भीर समस्या पर विराम लगेगा।।

आप सभी को हमारा सुझाव कैसा लगा ज़रूर बताए साथ ही इस विषय पर आपकी क्या राय है कॉमेंट के माध्यम से हमारे साथ ज़रूर साँझा करे ।।

Sharing is caring!