हिंदू शास्त्रों के अनुसार जहाँ ‘ अध्यात्म ‘ मनुष्य को जीवन की सम्पूर्ण संरचना दर्शाता है तो वहीं जीवन के चक्रव्यू के अंत में ‘ मोक्ष ‘ को प्राप्त कर पाना जीवन की अंतिम इच्छाओं में से एक है और जीवन और मोक्ष के बीच संतुलन बनाए रखने वाला नियम है ‘ योग ‘ उत्तराखंड का ऋषिकेश स्थान इन्ही तीन शक्तियों से देश भर में प्रख्यात है।

#ऋषिकेश विषयी जानकारी

इतिहासकरो का मानना है की ऋषि ‘ राभ्या ‘ यही कई वर्षों तक जंगलो में घोर तपस्या जिसके पश्चात भगवान श्रीराम ने ‘ ऋषिकेश ‘ रूप में उन्हें दर्शन दिया था। तत्पश्चात् इस स्थान को ऋषिकेश नाम से सम्बोधित किया जाने लगा। हरिद्वार से ऋषिकेश की दूरी २५ किलोमीटर की है तो वही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से इसकी दूरी लगभग ४३ किलोमीटर की है। हिमालय की पहाड़ियों से निकाल कर ऋषिकेश ऐसा पड़ाव है जहाँ पावन नदी ‘ गंगा ‘ समतल भूभाग में विस्तृत हो जाती है और यही से होते हुए आगे भी वह कई अन्य छोटी बड़ी नदियों में विभाजित हो जाती है । तो वहीं अनेको प्राचीन व एतिहासिक आश्रम, मंदिर व योगपीठ भी देशी विदेशी सैलनियो के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बना है।

#आस्था व मोक्ष का प्रवेश द्वार

बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमनोत्री जैसे हिंदू आस्था के चार बड़े तीर्थस्थलों की यात्रा का प्रवेशद्वार ऋषिकेश को मना जाता है । यहीं से मुख्य रूप से यात्रा की शुरूवात होती है। सांसारिक मोहमाया से दूर अक्सर ऋषि मुनि, साधु साध्वी यही मोक्ष की खोज में साधना किया करते है। इसी के साथ मनोरम प्रकृति वातावरण में ध्यान , साधना के बीच ईश्वर से ख़ुद को जोडे रखने का आभास ही श्रधालुओ व अन्य यात्रियों को अपनी ओर इस स्थान तक खींच लाता है।

#विश्व रॉक बैंड बीटल्स का ऋषिकेश आने का कारण

१९६० के दशक में विश्वभर में अपने संगीत से लोगों को थिरकने वाले ‘ बीटल्स बैंड ‘ के चारों संगीतकार भी खुद को ऋषिकेश आने से ना रोक पाए। दरहसल वर्ष १९६७ के दौर में लंदन में महर्षि ‘ महेश योगी ‘ द्वारा सेमिनार आयोजित किए गए थे। जहाँ एक सेमिनार में ‘ बीटल्स बैंड ‘ के संगीतकारो की महर्षि जी से मुलाक़ात हुई। महर्षि जी से प्रभावित हो कर वर्ष १९६८ को ‘ बीटल्स बैंड ‘ के संगीतकार ऋषिकेश महर्षि जी के आश्रम आ पहुँचे। आश्रम आकर उन्होंने महर्षि जी से ध्यान, चिंतन, योग जैसी शिक्षाए हासिल की , इसी बीच उन्होंने ४० गीतो के लेख भी तैयार किए। १९७० में ‘ महर्षि महेश योगी ‘ जी की मृत्यु पश्चात यह आश्रम ३० वर्षों तक ख़ाली पड़ा रहा जिसके बाद वनविभाग द्वारा इसे धरोहर घोषित करते हुए ‘ बीटल्स आश्रम ‘ नाम दे दिया गया ।

 

#विश्व योग केंद्र

वर्षों वर्षों से ऋषियों , तपश्वियो के लिए जीवन का अर्थ सिर्फ़ चिंतन , ध्यान और योग ही रहा है। आज इन्ही प्राचीन योग प्रणाली के प्रयोग से मानवीय जीवन में हो रहे सकारात्मक बदलाव को देखते हुए। ‘ विश्व स्वास्थ संस्था ‘ द्वारा ऋषिकेश को ‘ विश्व योग केंद्र ‘  के रूप में घोषित किया जा चुका है। आज देश विदेशों से सैलानी योग शिक्षा लेने ऋषिकेश आते है जो की हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

 

#सैलनियो का आकर्षण

आज ऋषिकेश ना केवल ज्ञान, योग , साधना, आस्था जैसी मौलिक ज़रूरत के लिए जाना जाता है बल्कि ईश्वर द्वारा दी गई प्राकृतिक सुंदरता से भी यह स्थान परिपूर्ण है। भारत की तीन प्रमुख गंगा , यमुना व सरस्वती जैसी पावन नदियों का संगम भी यही देखने को मिलता है इसके अलावा राम झूला, लक्ष्मण झूला ,स्वर्गाश्रम, भरत मंदिर , निलकंठ मंदिर आदि स्थान यहाँ देखने योग्य है। साहसिक खेल पसंद करने वाले यात्रियों के लिए भी यंहा कई पर्याय मौजूद है जैसे राफ़्टिंग, बंजी जम्पिंग, काइऐकिंग, माउंटेन बाइकिंग, रॉक क्लाइमिंग, रपेलिंग इत्यादि।।

आप सभी भी अपने जीवन काल में एक बार ऋषिकेश अवश्य जाए व अपना अनुभव कॉमेंट के माध्यम से हमारे साथ साँझा करे ।। 🙏🏻धन्यवाद 🙏🏻 -विकिता भट्ट

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